बीरबल और अकबर की 4 मज़ेदार कहानियाँ Four Akbar and birbal Stories.

आज की हमारी पहली कहानी मे आपको पता चलेगा कि अकबर और बीरबल की मुलाक़ात कैसे हुई और उनका बीरबल नाम कैसे मिला ?

कहानी 1 – बीरबल कैसे बना नवरत्न ?

एक समय की बात है। बादशाह अकबर अपनी टोली के साथ शिकार पर निकले थे। अब काफी दिन बीत चुके थे और उन्हें अब तक कोई शिकार नहीं मिला था।
अकबर – हम जंगल के बीचो बीच पहुंच गए हैं लेकिन हमें अभी तक कोई शिकार नहीं मिला।
बादशाह अकबर चिल्लाए – शेरखान! तुम तो कह रहे थे कि इस जंगल मे बहुत सारे शिकार हैं लेकिन ऐसा लगता तो नहीं है।
शेरखान – मममम…ममम.. माफी चाहता हूँ बादशाह लेकिन पिछली बार….
अकबर – मैं अपने महल वापिस जाना चाहता हूँ। इसी वक्त… हमसे आगरा पहुँचकर बात करना।
( नाराज़ अकबर आगरा की तरफ चलते है। पर जल्द ही वे रास्ता भटक चुके थे। ) अकबर – हमको कौन से रास्ते से चलना चाहिए जिससे हम आगरा पहुँच जाए ?
( बादशाह अकबर ने अपने सैनिकों से पूछा। )
सैनिक 1 – पहला वाला बादशाह।
सैनिक 2 – दूसरा वाला… ये ज़्यादा जाना पहचाना सा लगता है।
अकबर – और तुम क्या कहतो हो शेरखान।
शेरखान – वो… मेरे बादशाह…
बादशाह अकबर ने देखा एक युवक उसी रास्ते से गुज़र रहा था।
अकबर – ज़रा रुको नौजवान, क्या तुम हमें बता सकते हो कि इनमें से कौन सा रास्ता आगरा को जाता है?
युवक – श्रीमान, इनमें से कोई भी रास्ता आगरा नहीं जाता।
अकबर – तुम कहना क्या चाहते हो?
युवक – लोग जाते है, रास्ते नहीं। क्यों ? 😂😂😂😂
( सब ठहाके लगाकर हँसते है। )

यह भी पढ़े :- भारत के रोचक तथ्य हिंदी में Facts About India In Hindi

अकबर – हाँ, तुमने सही कहा। बताओ मुझे, तुम्हारा नाम क्या है?
युवक – मेरा नाम महेश दास है। जनाब! अब आप मुझे अपने बारे मे बताइए, आप कौन है और आपका नाम क्या है ?
अकबर – तुम बादशाह अकबर से बात कर रहे हो। पूरे हिंदुस्तान का बादशाह! मेरे दरबार में मुझे तुम जैसे निडर और हँसमुख लोगों की जरूरत है। अगर तुम मेरे शाही दरबार में शामिल होना चाहते हो तो इस अंगूठी को लेकर मेरे पास आना और मै तुम्हें पहचान लूँगा। (बादशाह अकबर अपनी अंगूठी उतार कर देते है) अब हमें आगरा जाने का रास्ता बताओ ? हम सभी बहुत थके हुए है और सूरज छिपने से पहले हमें आगरा पहुँचना है।
( बादशाह अकबर को आगरा जाने का सही रास्ता मिल गया और साथ ही एक महेश दास भी। )
कई वर्षों बाद जब महेश दास उसी रास्ते से गुज़र रहे थे तो उन्हें बादशाह अकबर की बाते याद आयी। महेश दास बादशाह अकबर के किले मे पहुँचे।
)

यह भी पढ़े :- Free Online Earning Platform घर बैठे ऑनलाइन पैसे कमाए

उन्होंने सिपाही से कहा – मैं बादशाह से मिलना चाहता हूँ।
सिपाही – रुको पहले मुझे अंदर पूछने दो। सिपाही अनुमति लेने दरबार गया।
फिर बाहर लौटा और कहा – अब तुम अंदर जा सकते हो।
( महेश दास पहली बार बादशाह अकबर के दरबार में आए थे। )
अकबर – तुम्हारा नाम क्या है ? क्या हम एक दूसरे को जानते हैं ?
बीरबल – मेरे बादशाह! मैं महेश दास हूँ।
अकबर – मैंने यह नाम सुना तो है। लेकिन कुछ याद नहीं आ रहा।
महेश दास ने बादशाह अकबर की दी हुई अँगूठी दिखाई।
अकबर – ओह महेश! मैं तुम्हे पहचान गया। मुझे तुम्हारा मजाक बहुत अच्छा लगा था। लेकिन मैं तुम्हारा इम्तहान लेना चाहूंगा। यह जांचने के लिए कि क्या तुम वही आदमी हो या कोई और। मेरे दरबार के पाँच दरबारी तुमसे एक – एक सवाल पूछेंगे। देखते हैं कि तुम उन्हें क्या जवाब देते हो।
बादशाह का यह फरमान सुनकर उनके मंत्रियों ने सवाल पूछने शुरू किए।
पहला सवाल – ऐसे पड़ोसियों के बारे में बताओ जो एक दूसरे को देख नहीं सकते ?
उत्तर – आंखें, आंखें मेरे दोस्त।
दूसरा सवाल एक ऐसे दुश्मन का नाम बताओ जिसे हराया नहीं जा सकता ?
उत्तर – मृत्यु।
तीसरा सवाल ऐसा क्या है जो मौत के बाद भी जिंदा रहता है ?
उत्तर – गर्व, महिमा।
चौथा प्रश्न (सवाल एक रेखा थी) रेखा को बिना मिटाए, छोटा करो ?
उत्तर – महेश दास ने रेखा के नीचे उससे बड़ी रेखा खींच दी।
पांचवा सवाल कुछ ऐसा बताओ जिसे ना तो चांद देख सकता है और ना ही सूरज ?
उत्तर – अंधकार।
और इसके बाद बादशाह अकबर बोले – अब मेरी बारी है तुमसे सवाल पूछने की।
सवाल – आगरा की गलियों में कितने मोड़ है ?
उत्तर – सिर्फ दो मेरे बादशाह, बाएं और दाएं।
अकबर – आज से तुम मेरे नवरत्नों में से एक होंगे और तुम्हें महाराज बीरबल के नाम से जाना जाएगा।
“महाराज बीरबल की जय” “महाराज बीरबल की जय”

यह भी पढ़े :- रोजगार बाजार के बारे में सम्पूर्ण जानकारी (Complete Information on Rojgar Bazaar)

कहानी 2 – सबसे बड़ा मूर्ख कौन ?

( एक दिन अकबर अपने कमरे में अकेला बैठा था। तभी उसके दिमाग में एक ख्याल आया। उसने बीरबल को बुलाया। बीरबल बिना देर किए वहां आ गया। अकबर अक्सर अजीब सवाल पूछता था और अजीब इच्छा होती थी। लेकिन इस बार जो बीरबल सुनने वाला था, यह तो बहुत ही ज्यादा अजीब था। )
अकबर – बादशाह होने की वजह से मैं हमेशा समझदार लोगों से ही मिलता हूँ। हमेशा ही मैं समझदार और पढ़े लिखे लोगों से घिरा रहता हूँ और मैंने बेवकूफ़ तो एक भी नहीं देखा लेकिन अब मैं बेवकूफों के बारे में जानने के लिए बहुत उत्सुक हूँ। तो मैं तुम्हें यह काम सौंपता हूं कि तुम हमारी सल्तनत के बाद सबसे बड़े 5 मूर्ख ढूंढ कर लाओ।
बीरबल – जैसा आप कहें जहाँपनाह! मैं ऐसा ही करूंगा।
अकबर – मैं तुम्हें 5 सबसे बड़े मूर्खों को ढूंढ कर लाने के लिए एक महीने का वक्त देता हूँ ।
बीरबल – यह तो बहुत ज्यादा वक्त हो गया है जहाँपनाह। मैं आपके लिए यह काम बहुत जल्द खत्म कर दूंगा।
( जब बीरबल शहर की तरफ जा रहा था तो उसे एक बहुत ही अजीब चीज दिखाई दी। उसने अपने आगे चलने वाले आदमी को आवाज दी। )
बीरबल – अरे हाँ भाई! तुमने यह इतना सारा वजन क्यों उठाया हुआ है ? जबकि तुम इसे काठी पर भी लाद सकते हो।
राहगीर – मेरा घोड़ा बहुत कमजोर है। हुजूर! इतने लकड़ियों के बोझ की वजह से वह गिर सकता है और फिर शायद कभी काम ही ना कर पाए। इसलिए मैं लकड़ियों को अपने सिर पर रख कर ले जा रहा हूँ।
बीरबल – यह लो हमारा पहला मूर्ख तो मिल गया। आओ, मेरे साथ चलो मैं तुम्हें नया और मजबूत घोड़ा दूंगा। फिर तुम्हें कभी भी अपने सिर पर वजन नहीं उठाना पड़ेगा।
राहगीर (पागल 1) – आप तो बड़े दयावान है, हुज़ूर। मैं आपका शुक्रिया अदा कैसे करूं। मेरे पास शब्द नहीं है।

यह भी पढ़े :- BEAUTY PRODUCTS FOR FACE IN HINDI

( दोनों साथ में आगे चल दिए। कुछ देर के बाद एक आदमी को जमीन पर लेटे दोनों हाथ उठाए हुए देखा। वो रुक गए और पूछने गए कि क्या परेशानी है ? )
बीरबल – मुझे लगता है उस आदमी को चोट लगी है। चलो चल कर देखता हूँ। क्या पता मैं उसकी कुछ मदद कर पाऊँ।
( बीरबल उस आदमी से जा कर पूछते हैं। ) क्या तुम ठीक हो भाई क्या तुम्हें मदद की जरूरत है। चलो, मैं तुम्हें खड़ा होने में मदद करता हूँ।
आदमी – नहीं, नहीं, कृपया मेरे हाथों को छूना मत।
बीरबल – ओह! मुझे माफ कर दो। क्या तुम्हें चोट लगी है ? क्या तुम्हारे हाथों में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है ?
आदमी – नहीं, नहीं, बिल्कुल नहीं। मेरी बीवी ने मुझसे इतना बड़ा घड़ा लाने को कहा है। अगर मैंने अपने हाथ हिलाए तो मैं घड़े का आकार भूल जाऊंगा और इससे वह बहुत गुस्सा होगी। और फिर पूरी जिंदगी गलत आकार का घड़ा लाने के लिए मुझे परेशान करेगी।
बीरबल – कितना बड़ा मूर्ख आदमी है। इसे भी मुझे अपने साथ ले चलना चाहिए। (बीरबल ने दूसरे पागल का हाथ पकड़ लिया और उससे उठा लिया। ) बीरबल – मैं तुम्हारे लिए हर आकार का घड़ा खरीद लूंगा और तुम्हारी बीवी फिर कभी गुस्सा नहीं होगी। ऐसा करूँ तो ठीक रहेगा ना।
दूसरा पागल – बिल्कुल, आपका बहुत-बहुत शुक्रिया हुजूर।
बीरबल – आप मेरे साथ चलो।
( जैसे ही बीरबल अपने घोड़े पर चढ़ने वाला था। एक आदमी सीधा आकर उससे टकरा गया।)

यह भी पढ़े :- moral story in hindi – गधे और घोड़े की कहानी। नक़ल बिना अक्कल।

बीरबल – तुम्हारी क्या परेशानी है ? क्या तुम्हारा दिमाग खराब हो गया ? क्या तुम्हें दिखाई नहीं देता
तीसरा पागल – मैंने अभी-अभी एक भाषण दिया है और मैं देखना चाहता हूँ कि मेरी आवाज कहाँ तक जा सकती है। मैं उसी के पीछे भाग रहा था मगर आपने सब खराब कर दिया।
(कुछ देर तक बीरबल उस नेता की बेवकूफी सुनकर उसे देखता रहा।)
बीरबल – मैंने भी कभी नहीं सोचा था कि हमारी सल्तनत में इतने बड़े बेवकूफ रहते हैं। चलो इस आवाज के बारे में भूल जाओ और फिर वह तो तुम कभी भी कर सकते हो। तुम मेरे साथ चलो मैं तुम्हें बहुत सारा सोना दूंगा।
( बीरबल उन सभी को लेकर अपने घर गया और उसने वहां उन सबको रुकने को कहा।)
तुम सब यहीं रुको जब तक मैं वापस ना जाऊं। ( बीरबल को और बेवकूफ ढूंढने के लिए ज्यादा दूर नहीं जाना पड़ा। जैसे ही वह घर के बाहर निकला, उसने थोड़ी दूरी पर ही 2 लोगों को लड़ते हुए देखा। वह यह देखने गया कि क्या परेशानी है ?)
बीरबल – तुम दोनों लड़ क्यों रहे हो ?
पहला व्यक्ति – हुजूर इस ने मुझे धमकी दी है कि यह अपने शेर को मेरी भैंसों पर छोड़ देगा।
बीरबल – पर मुझे ना तो यहाँ भैसें दिख रही है और ना ही शेर।
दूसरा व्यक्ति – आपको दिखेंगे हजूर, अगर ऊपर वाले ने हमारी एक-एक इच्छा पूरी कर दी तो। मैं एक शेर मांग लूंगा और यह एक भैंस।
पहला व्यक्ति – क्या आपने सुना हुज़ूर, अब आपको मुझ पर यकीन हो गया ना ? यह हमेशा कहता रहता है कि अगर मैं एक भैंस माँगूँगा तो ये एक शेर। जो मेरी भैंस खा जाए। और यह बिल्कुल भी सही नहीं है।
दूसरा व्यक्ति – और मैं ऐसा जरूर करूंगा।
पहला व्यक्ति – ओह! तो तुम नहीं मानोगे ?
(और वे दोनों फिर लड़ने लग जाते है। )

यह भी पढ़े :- Most Subscribed Individual Indian youtubers and their income In 2020

बीरबल – बेवकूफ़ों, मैंने कहा यह बंद करो। मैं कह रहा हूँ, यह सब इस वक़्त रोक दो। तुम दोनों इसी वक्त मेरे साथ चलो ।
(वह दोनों को अपने घर ले गया और पांचों को जहाँपनाह के सामने हाजिर करने के लिए सुबह तक इंतजार करने को कहा। अगले सुबह बीरबल उन पाँचों को लेकर दरबार पहुंच गए।)
अकबर – बीरबल, तुमने यह काम इतनी जल्दी खत्म कर लिया। तुम तो बड़े ही तेज हो ।
बीरबल यह इतना मुश्किल नहीं था। सभी को पता है कि एक बेवकूफ़ को ढूंढना एक समझदार आदमी को ढूंढने के ज्यादा आसान है।
( फिर बीरबल ने उन पांचों के साथ हुई घटनाओं के बारे में बादशाह अकबर को बताया। )
बीरबल – लेकिन क्या आप जानते हैं सबसे बड़ा मूर्ख कौन है ? वो इस वक़्त इस राजदरबार मैं ही बैठे हैं।
अकबर – कौन है वो बीरबल ?
बीरबल – वो आप और मैं है।
अकबर – ये तुम क्या कह रहे हो बीरबल ? अपनी ज़बान को लग़ाम दो।
बीरबल – ये काम अपने आप मे बहुत बड़ी बेवकूफ़ी थी। इस तरह से आप भी एक बेवकूफ़ है। जिसने मुझे बेवकूफों को ढूंढने का काम दिया और मैं भी जिसने उस हुकुम का पालन किया।

कहानी 3 – समझदारी से भरा घड़ा

एक दिन अकबर और उसके दरबारी दरबार मे बैठे थे । तभी राजा सीलोन के दरबार का एक दूत वहाँ आ पहुँचा। वो एक विशेष काम के लिए आया था।
दूत – सलाम जहाँपनाह मैं राजा सीलोन के दरबार से आया हूँ।
अकबर – हमारी सल्तनत मे आपका स्वागत है।
दूत – जहाँपनाह आपके दरबार मे बहुत सारे बुद्धिमान दरबारी है और मेरे राजा ने समझदारी से भरे घड़े की गुजारिश की है।
दरबारी – अब ये कौन सी नई बल है।
दूसरा दरबारी – ये तो बेहूदा गुज़ारिश है।
दरबारी – सीलोन के राजा हमें मात देना चाहते हैं।
दूसरा दरबारी – और वो सफल भी हो जाएगा। कोई भी नही, यहाँ तक की बीरबल भी हमें इस परेशानी से नही बचा सकता।
दरबारी – ये तो बहुत ही मुश्किल गुज़ारिश की है सीलोन के राजा ने।
अकबर – हाय! तुम्हारा इस बारे मे क्या कहना है बीरबल।

यह भी पढ़े :- हल षष्टी या ललई छठ व्रत कथा | Hal shashti aur lalai chath vrat katha |

बीरबल – हाँ, हम थोड़ी बहुत समझदारी तो भेज ही सकते है सीलोन के राजा के लिए।आखिरकार उन्होंने हमसे गुज़ारिश की है और हमें उनकी इच्छा पूरी करनी चाहिए।
अकबर – अगर तुम ऐसा कहते हो बीरबल तो ठीक है। तुम जो भी करोगे, ठीक ही करोगे। मुझे तुम पर पूरा यकीन है।
बीरबल – शुक्रिया जहाँपनाह! मुझे घड़े को भरने के लिए कुछ हफ़्तों का वक़्त लगेगा।
दूत – आप जितना चाहे वक़्त ले सकते है। मुझे कोई जल्दी नहीं।
अकबर – मैं उम्मीद करता हूँ कि तुम जानते हो कि तुम्हें क्या करना है। हालाँकि मुझे तुम पर भरोसा है, लेकिन ये काम थोड़ा मुश्किल है। और तुम्हें पता है ना कि ये चुनौती तुमने स्वीकार कर ली है। जिससे हमारी भी इज़्ज़त दाव पर लगी हुई है।
बीरबल – चिंता मत कीजिये जहाँपनाह! सीलोन के राजा को समझदारी से भरा हुआ घड़ा जरूर मिलेगा।
( उसी शाम बीरबल ने अपने सहायक को बुलाया। बीरबल के दिमाग में एक कमाल की योजना थी। )
बीरबल ने मन ही मन सोचा – मेरी ये योजना बिल्कुल भी असफल नही होगी। और सीलोन के राजा की इच्छा भी जरूर पूरी होगी। मुझे कुछ मिट्टी के घड़े चाहिए। जिनकी गर्दन थोड़ी पतली हो। जितनी जल्दी हो सके ये मेरे पास लेकर आओ।
बीरबल बाहर बगीचे में गया और अपनी योजना के बारे मे सोचने लगा और कुछ ही देर में बीरबल का सहायक भी वह कुछ घड़े लेकर आ गया। जैसा कि बीरबल ने कहा था।
सहायक – ये रहे आपके घड़े, हुज़ूर।
बीरबल – बहुत बढ़िया, ये घड़े लेकर मेरे पीछे कद्दू की क्यारी में आओ। उनमे से एक घड़ा मुझे दे दो ।
( बीरबल ने घड़े के आस पास लकड़ियाँ लगा दी थी ताकि उसे ज़मीन मे अच्छे से जमा सके और फिर उसने एक घड़ा कद्दू के फूल पर रख दिया।)
फिर अपने सहायक से कहा कि वह बाकी सारे घड़े भी कद्दू के फूल पर रख दे।
जब उसने आखिरी घड़ा भी रख दिया तो बीरबल ने ऐसे देखा जैसे उसने जीत हासिल कर ली हो।
बीरबल ने अपने सहायक से कहा कि इन फूलों को खाद और पानी मिलता रहे। ताकि ये अच्छे से बड़े हो सके और किसी को भी इन्हें छूने मत देना सिवाए माली के।

यह भी पढ़े :- Moral Story In Hindi – मीनू की सूझबूझ

सहायक – जी हुज़ूर।
बीरबल – जल्द ही में ये तुमसे लेने आऊँगा
सहायक – जैसा आप चाहे हुज़ूर।
( इस बीच कद्दुओ का बहुत अच्छे से ख्याल रखा गया।)
कुछ हफ़्तों बाद…….
अकबर – काम को कुछ आगे बढ़ाया बीरबल। कई हफ्ते गुज़र चुके है। लेकिन तुम्हारी तरफ़ से कोई समाचार नही मिला।
बीरबल – मैंने काम लगभग खत्म कर ही लिया है जहाँपनाह।
अकबर – मैं ये देखने के लिए बहुत ही उत्साहित हूँ कि तुम घड़े को समझदारी से कैसे भरोगे ?
बीरबल – अब मुझे 2 हफ्ते ओर चाहिए जहाँपनाह और फिर ये काम पूरा हो जाएगा। हम सीलोन के राजा के दूत को 2 हफ़्तो के बाद बुला सकते है।
अकबर – ठीक है, बहुत बढ़िया बीरबल। उम्मीद करता हूँ कि हमारी इज़्ज़त पर कोई दाग नही लगेगा।
बीरबल – ऐसा बिल्कुल नही होगा जहाँपनाह।
दो हफ्ते बाद…..
( सभी दरबार में इकट्ठे हुए। भीड़ में बहुत सारी फुसफुसाहट और हँसी सुनाई दे रही थी। सभी दरबारियों की नज़र बीरबल पर थी। उसने ऐसा क्या किया है घड़े को समझदारी से भरने के लिए।)
दरबारी – मुझे नही लगता बीरबल इस चुनौती को पूरा कर पाया होगा।
दूसरा दरबारी – मुझे भी ऐसा ही लगता है। ऐसा कर पाना किसी के लिए भी नामुनकिन है।
तीसरा दरबारी – अरे! वो बीरबल है। जरूर उसने घड़े को भरने का कोई न कोई रास्ता निकाल लिया होगा।
( सभी उस चुनौती ओर उसके परिणाम के बारे मे बाते कर रहे थे। बीरबल और दूत, अकबर के दरबार में उसके सामने हाज़िर होते है।)
अकबर – समझदारी से भरे हुए घड़े को दिखाने के लिए क्या तुम तैयार हो बीरबल ?
बीरबल – जी है जहाँपनाह, मैं तैयार हूँ।
( बीरबल ताली बजाते हैं। सभी लोग दरवाज़े की तरफ देखने लगते है। बीरबल का सहायक घड़े को थाली मे रख कर हाज़िर होता है। सहायक आकर बीरबल के पास खड़ा हो जाता है। )

यह भी पढ़े :- बुधवार व्रत विधि व कथा। Budhvaar Vrat vidhi aur Katha.

बीरबल – ये लीजिये जहाँपनाह आपके सामने समझदारी से भरा घड़ा आ चुका है।
( घड़े को ऊपर से कपड़े से ढका हुआ था ताकि कोई देख न सके कि अंदर क्या है। )
दरबारी – ये नामुमकिन है ।
दूसरा दरबारी – ऐसा हो ही नहीं सकता।
तीसरा दरबारी – हाँ, हाँ, ऐसा कैसे हो सकता है।
अकबर – शांत हो जाओ।
बीरबल दूत से – यह लो, अपने राजा के पास ले जाओ। लेकिन याद रहे यह सारे घड़े तुम्हें खाली करके वापस पहुंचाने होंगे, वह भी बिना कोई नुकसान पहुंचाए। और अगर आप समझदारी के फल को बाहर निकालना चाहते हैं तो उसे भी कोई खरोच नहीं आनी चाहिए।
दूत – क्या मैं इसे देख सकता हूँ।
बीरबल – हाँ, जरूर अब यह आप ही का है।
( जैसे यह दूत घड़े में देखता है। उसे एक कद्दू दिखाई देता है, वह चौक जाता है। )
दूत – लेकिन…. उमममममम……
बीरबल – हमारे पास पाँच घड़े और है। अगर आपके राजा को ओर समझदारी चाहिए, तो ले जा सकते हैं।
दूत – तुम्हारे सामने कोई खड़ा हो सकता है बीरबल। तुम लाखों में एक हो। हम तुम से पंगा क्यों लेते हैं।
( दूत घड़ा लेकर चला जाता है। )
अकबर – बीरबल, मैं बहुत ज्यादा उत्साहित हूँ समझदारी के उस फल को देखने के लिए। तुमने कहा था तुम्हारे पास 5 और है। है ना ?
बीरबल – जी जहाँपनाह! मेरे पास 5 और है। मैं अभी आपके लिए मंगवाता हूँ।
बीरबल अपने सहायक से – दूसरे घड़े भी ले आओ।

यह भी पढ़े :- श्री राम जन्मभूमि के बारे में सम्पूर्ण जानकारी complete Information on shri ram janmabhoomi

सहायक – जी हुजूर।
( जैसे ही सहायक घड़ा लेकर आता है और अकबर उसमें देखता है। वह चौक जाता है। और फिर जोर जोर से हँसने लगता है। )
( पूरा दरबार यह देखना चाहता था कि उस घड़े में क्या था।
)
अकबर – बिल्कुल यही है समझदारी का फल। सीलोन के राजा इसे देखकर जरूर समझदार बन जाएंगे।
( इसके बाद घड़ा सब को दिखाया गया। सभी बीरबल की बहुत तारीफ करते हैं। )
अकबर – बीरबल तुम्हें मेरे सबसे अच्छे राजदरबारी हो। तुम्हारे आगे सब पानी कम है। हा हा हा हा हा हा….

कहानी 4 – लालची साधु और बूढ़ी औरत

अमीर या गरीब परेशानी में सब बीरबल की मदद लेते थे। और ऐसे ही एक दिन बूढ़ी औरत बीरबल से मदद लेने के लिए आई।
बूढ़ी औरत – मेरी मदद कीजिए हुजूर। मेरे साथ धोखा हुआ है। अब मेरे पास कुछ भी नहीं बचा। कृपया मेरी मदद कीजिए।
बीरबल – कृपया बैठ जाइए। और आराम से बताइए कि आखिर हुआ क्या है ?
बूढ़ी औरत – यह एक लंबी कहानी है। 6 महीने पहले, मैं एक तीर्थ यात्रा पर जाना चाहती थी। लेकिन मुझे अपने पैसों की चिंता थी, कि कहीं ये चोरी ना हो जाए जब मैं बाहर जाऊं तो। आखिरकार मैंने एक सन्यासी से मिलने का फैसला किया जिसके बारे में मैंने सुना था। वह गांव के बाहर ही रहता था।
बूढ़ी औरत ने सन्यासी से कहा – महाराज! मुझे आपकी मदद की जरूरत है।
सन्यासी – मैं किस तरह तुम्हारी मदद कर सकता हूँ ?
बूढ़ी औरत – मैं एक तीर्थ यात्रा पर जा रही हूँ और मेरा यहाँ कोई भी नहीं है जो मेरे पीछे से मेरी धन की रक्षा कर सकें। और इसीलिए मैं यहां आई हूँ। ताकि यह धन मैं आपके पास रख सकूं। जब तक कि मैं वापस नहीं आ जाती।

यह भी पढ़े :- सोमवार व्रत विधि व कथा। Somvar vrat vidhi aur katha.

सन्यासी – मैं यह नहीं ले सकता।
बूढ़ी औरत – कृपया सुनिए, मेरा यह थैला तांबे के सिक्कों से भरा पड़ा है। यह सब मैंने पाई-पाई करके जोड़ा है। और मेरे पास ऐसी कोई जगह नहीं है जहाँ मैं इन्हें रख सकूं। कृपया करके आप ही इन्हे अपने पास रख लीजिए। मैं जैसे ही वापस आऊंगी, आपसे वापस ले लूंगी।
सन्यासी – मुझे माफ करना, मैं दीन-दुनिया के चक्कर में नहीं पड़ना चाहता। मैं इन पैसों को हाथ नहीं लगा सकता। लेकिन मैं तुम्हें यह इजाजत दे सकता हूँ कि तुम मेरी झोपड़ी के पास कहीं गड्ढा खोदकर उसे जमीन के नीचे दबा दो।
बूढ़ी औरत – आप बहुत दयालु हैं साधु महाराज।
( बूढ़ी औरत झोपड़ी में जाती हैं और एक किनारे गड्ढा खोदकर उन पैसों को जमीन के नीचे दबा देती है। )
यहां यह पैसे सुरक्षित रहेंगे।
( सन्यासी खिड़की से यह सब कुछ देख रहा था। उसने देखा कि उस औरत ने यह सिक्के कहाँ छुपाए थे। )
बूढ़ी औरत ने सन्यासी से कहा – मैं आपकी बहुत आभारी हूँ। अब मैं अपनी तीर्थ यात्रा पर जा सकती हूँ।
( कुछ समय पश्चात बूढ़ी औरत अपना धन मांगने सन्यासी के पास जाती है। )
बूढ़ी औरत – सन्यासी महाराज! मैं अपना धन वापस लेने आई हूँ।
सन्यासी – तुम किस धन की बात कर रही हो ?
बूढ़ी औरत – वही ताँबे के सिक्कों का थैला जो मैंने तीर्थ यात्रा पर जाने से पहले आप की झोपड़ी में दबाया था।
सन्यासी – तुम्हें याद है तुमने उसे कहाँ गाढ़ा था। मुझसे मत पूछो, अंदर जाकर निकाल लो।
( बूढ़ी औरत अंदर जाकर उस जगह को खोदने लगती है, जहां उसने सिक्के छुपाए थे। )
बूढ़ी औरत – यहाँ तो है ही नहीं, मेरा सारा धन गायब हो गया।
( औरत चौक कर सन्यासी की तरफ दौड़ती है और उससे अपने पैसों के बारे में पूछती है।)

यह भी पढ़े :- मंगलवार व्रत कथा। mangalvaar(Tuesday) vrat katha

बूढ़ी औरत – साधु महाराज! जो मैंने सिक्कों का थैला जो मैंने गाढ़ा था, अब वहाँ नहीं है। मेरे सिक्के कहाँ है ?
सन्यासी – जाओ यहाँ से और मुझे सांसारिक चीजों से परेशान मत करो।
बूढ़ी औरत – लेकिन 6 महीने पहले मैंने धन वही दबाया था।
सन्यासी – यह हो सकता है लेकिन मैं इन सांसारिक वस्तुओं की तरफ नहीं देखता। मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही ख्याल है भगवान, भगवान और सिर्फ भगवान।
बूढ़ी औरत बीरबल से कहती है – अब मैं और क्या कर सकती थी, इसलिए मैं आपसे मदद मांगने आई हूँ। कृपया मेरी मदद करें हुजूर। मैं तो बर्बाद हो गई।
बीरबल – क्या ऐसा हो सकता है कि उस सन्यासी ने तुम्हारे सिक्के चुराए हो ?
बूढ़ी औरत – मुझे यकीन है कि उसी ने चुराए है। पर मेरे पास कोई सबूत नहीं है।
बीरबल – हममममम… तो चलो पता लगाते है। जो भी मैं कह रहा हूं उसे ध्यान से सुनो।
( बीरबल और बूढ़ी औरत सन्यासी की झोपड़ी के पास जाते हैं। )
बूढ़ी औरत – यही है वो जगह हुजूर।
बीरबल – अब जाओ और उस पेड़ के पीछे छुप जाओ और याद रहे तुम्हें बाहर तभी आना है। जब मैं उस सन्यासी के पैरों को दूसरी बार हाथ लगाऊं। ना उससे पहले ना, उसके बाद।
बूढ़ी औरत – मैं वैसा ही करूंगी। जैसा आपने कहा है हुजूर।
( बीरबल झोपड़ी के अंदर जाता है और देखता है कि सन्यासी झोपड़ी के बीच में बैठा है। और ध्यान में मग्न है।)
बीरबल – मुझे आशीर्वाद दे सन्यासी महाराज।
सन्यासी – तुम्हारी आयु लंबी हो।
बीरबल – यहां मैं आपसे मदद मांगने आया हूँ। लेकिन मुझे लगता है कि इस परेशानी में आप मेरी मदद नहीं कर पाएंगे।

यह भी पढ़े :- FATHER’S DAY GIFT IDEAS ( गिफ्ट आइडियाज फॉर फादर्स डे )

सन्यासी – बताओ बच्चा! मुझे अपनी परेशानी बताओ ?
बीरबल – नहीं महाराज आप रहने दीजिए। आप एक सन्यासी है। पर मेरी परेशानी के लिए मैं आपको परेशान नहीं कर सकता।
सन्यासी (सोचता है) – यह तो संदूक लेकर वापस जा रहा है. जरूर इसमें कुछ कीमती सामान होगा।
बीरबल – लेकिन इस जालिम दुनिया में मैं किस पर भरोसा करो। मेरा मार्गदर्शन कीजिए महाराज।
सन्यासी – पूरी बात बताओ बच्चा।
बीरबल – मुझे अजमेर जाकर अपने भाई से मिलना है। क्या ये कीमती हीरे मैं आपके पास छोड़ सकता हूँ ?
सन्यासी – बच्चा धन का ख्याल आना भी मेरे लिए पाप है। लेकिन मैंने तुम्हारी मदद करने का वादा किया है और भगवान का एक दास होने के नाते मैं अपने वादे से मुकर नहीं सकता। जैसा कि मैं धन को हाथ नहीं लगा सकता इसलिए तुम इस संदूक को मेरी कुटिया में कहीं दबा सकते हो। यह यहाँ पर सुरक्षित रहेगा।
बीरबल – आप कितने दयावान है। मैं आपका आभारी हूँ।
( इशारा देखते ही बूढ़ी औरत झोपड़ी के अंदर आ जाती है। )
सन्यासी (सोचता है) – कि यह कहाँ से आ गई। अगर इसने अपने धन के लिए चिल्लाना शुरू कर दिए तो ? मैं इन ताँबो के सिक्कों के लिए कीमती हीरो को जाने नहीं दे सकता। बिल्कुल नहीं। भगवान का शुक्र है तुम आ गईं। मैंने तुम्हारे थैलों के सिक्कों के बारे में बहुत सोचा। उस दिन जरूर तुमने गलत जगह पर ढूंढा होगा। तुम उस कोने में सिक्के क्यों नहीं ढूंढती ?
बूढ़ी औरत – लेकिन….
( सन्यासी बूढ़ी औरत को झोपड़ी के दूसरे कोने में ले जाता है। बूढ़ी औरत वैसा ही करती है जैसा वो कहता है

यह भी पढ़े :- इन Homemade Natural Morning और Night Skin care routine Beauty tips से पाए बेदाग निखरी त्वचा

बूढ़ी औरत – आपने सही कहा। मुझे अपने सिक्कों का थैला मिल गया।
सन्यासी – आप कब से अपने सिक्कों को गलत जगह ढूंढ रही थी ? धन से चिंता आती है, चिंता से याददाश्त कमजोर होती है और फिर आपका दिमाग खराब हो जाता है। क्या तुम सोच सकते हो कि इस औरत ने तो मुझ पर धन चोरी करने का इल्जाम भी लगा दिया था ? तो बच्चा! तुम अपनी संदूक इस झोपड़ी में कहीं भी छुपा सकते हो। पर अपने गाढ़ने की जगह याद रखना। मुझे सांसारिक मोह-माया समझ में ही नहीं आती है।
बीरबल (सोचते हैं) – वह तो दिख ही रहा है।
( बीरबल का एक सहायक दौड़ कर आता है। )
सहायक – आपके भाई आप से मिलने आए हैं। आपको जल्द से जल्द ही चलना चाहिए।
बीरबल -ओह हो! अब तो मुझे अजमेर जाने की कोई जरूरत नहीं है। मैं आपका बहुत आभारी हूँ महाराज।
( बीरबल संदूक लेकर चला जाता है और सन्यासी दरवाजे पर खड़ा देखता ही रह जाता है। मैं समझ नहीं पाता कि उसके साथ क्या हुआ है )

यह भी पढ़े :- कहानी -रास्ते का पत्थर (Roadblock) Motivational Stories In Hindi

3 thoughts on “बीरबल और अकबर की 4 मज़ेदार कहानियाँ Four Akbar and birbal Stories.”

Leave a Reply