moral story in hindi – गधे और घोड़े की कहानी। नक़ल बिना अक्कल।

नमस्कार दोस्तों, आज की कहानी का शीर्षक है – नक़ल बिना अक्कल। गधे और घोड़े की कहानी।

हम अक्सर लोगो की नक़ल करते है बिना ये सोचे की इसका परिणाम हम पर और उस व्यक्ति पर क्या पड़ेगा। किसी ने कोई काम करा और वो सफल हो गया, तो हम सोचते है कि हम भी यही काम कर लेते है और सफल हो जाते है। हर कोई अपने जीवन में नक़ल जरूर करता है और नक़ल करना बुरी बात नहीं है लेकिन हमारी नक़ल से हमारा या दूसरे का नुकसान न हो। कहते है न कि नक़ल के लिए अक्कल की जरूरत पड़ती है।

यही बात हम आपको इस कहानी के माध्यम से समझते है। तो चलिए अपनी कहानी की तरफ बढ़ते है –

बहुत समय पहले की बात है एक गांव में एक धनी व्यापारी रहता था। वह नमक और रूई का व्यापारी था। उसके पास कई सारे गधे और घोड़े थे, जिनका इस्तेमाल वह सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से ले जाने के लिए करता था । ऐसे ही एक बार व्यापारी पर दूर गांव से नमक और रूई को लेकर जाने के लिए एक व्यक्ति आया और उसने धनी व्यापारी से रूई और नमक बड़ी मात्रा में खरीदा।

इसके बाद व्यापारी ने खुश होकर उसको एक गधा और एक घोड़ा उपहार में दे दिया और उसका रात में रुकने का भी प्रबंध किया। अगली सुबह जब वह सामान गधे और घोड़े पर लादा गया तो गधे पर रूई और घोड़े पर नमक को लादा गया ।

जैसे-जैसे समान उनकी पीठ पर लादा जा रहा था, वजन के कारण गधे और घोड़े के सिर वजन से झुकने लगे और फिर गधे और घोड़े सिर झुकाकर अपनी नए मालिक के पीछे पीछे चलने लगे। कुछ दूर चलने के बाद वह आदमी रुका और उसने थोड़ा विश्राम करा।,फिर खाना पीना खाया और उसके बाद उसने फिर चलना प्रारंभ करा.

आधे से ज्यादा रास्ता पार करने के बाद रास्ते में एक नहर आयी। गधा और घोड़ा दोनों अपने मालिक के साथ उस नदी को पार कर रहे होते है तभी घोड़े का पैर थोड़ा फिसल जाता है जिस वजह से वह नदी में नमक के साथ थोड़ा सा डूब जाता है। जिस कारण उसका नमक पानी में बह जाता है और इससे उसका भार कम हो जाता है, तुरंत मालिक घोड़े की पूंछ को पकड़कर ऊपर की ओर खींच लेता है।और घोड़ा खड़ा हो जाता है और फिर से चलना शुरू कर देता है।

यह देख गधे को भी यही तरकीब सूझी

उसने भी मन बना लिया कि आगे आने वाली नदी में वह भी घोड़े की तरह पानी में डुबकी मार के अपना वजन हल्का कर लेगा और वह नदी का इंतजार करने लगा।

जैसे ही आगे एक नदी आई गधा, अपनी तरकीब के अनुसार नदी में डुबकी मार गया परंतु गधे की पीठ पर रूई थी। जिस वजह से रूई पानी में भीग कर भारी हो गई और गधे की पीठ पर जो भार था वह दोगुना हो गया और मालिक ने वही किया जैसा उसने घोड़े के समय फिसलने पर किया था।

उसने गधे की पूँछ पकड़कर खींचा परंतु गधा नहीं उठ पाया और मालिक ने उस पर डंडे मारे और जैसे तैसे वह खड़ा हुआ लेकिन अब उससे वजन नहीं संभल रहा था क्योंकि भार दुगना हो गया था। भार गधे से नहीं संभल रहा था और इससे गधे के दोनों पैर कांप रहे थे, लेकिन फिर भी गधा धीरे धीरे चलकर गांव पहुंचा।

रात में जब गधे और घोड़े को एक साथ बांधा गया तो गधे ने घोड़े से पूछा कि जब तुम पानी में बैठे थे तब तुम्हारा भार हल्का हो गया था परंतु जब मैं पानी में बैठा तो मेरा भार पहले से दोगुना हो गया।

तो इस पर गधे को घोड़े ने बोला कि – ” मेरी पीठ पर नमक था, जो पानी में बैठने की वजह से बह गया और मेरा वजन हल्का हो गया। परंतु तुम्हारी पीठ पर रूई थी, जिस वजह से पानी में भीग कर पहले से ज्यादा भारी हो गई।

नक़ल बिन अक्कल कहानी से हमें शिक्षा मिलती है-

गधे और घोड़े कहानी से शिक्षा
गधे और घोड़े कहानी से शिक्षा

विचार किए बिना दूसरे की नकल नहीं करनी चाहिए क्योंकि जरूरी नहीं, जो उसके लिए सही है वहीं आपके लिए भी सही होगा। सब की परिस्थितियां अलग-अलग होती है और हर मुश्किल का हल परिस्थिति के अनुसार किया जाता है।

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