श्री जगन्नाथ धाम पुरी,उड़ीसा के तथ्य रहस्यमयी अनसुलझे चमत्कार

आज हम बात करेंगे श्री जगन्नाथ धाम पुरी मंदिर के 10 ऐसी बातें जो शायद आपको ना पता हो,मगर उससे पहले हम रहस्यमयी मंदिर के बारे में थोड़ा जान लेते है और आखिरी में हम आपको भगवान के दिल के बारे में बताएंगे तो आज भी श्री जगन्नाथ भगवान का दिल की काठ की मूर्ति में रखा हुआ है।

काठ की मूर्ति की कहानी

मान्यता है कि मालवा के राजा इंद्रघुम्न जो कि भगवान् विष्णु के परम भक्त थे उन्हें खुद भगवान विष्णु ने सपने में आकर दर्शन दिए और बताया कि पुरी के समुद्र तट पर दारु ( लकड़ी ) का लठ मिलेगा उससे तुम मूर्ति का निर्माण कराओ।
अगले दिन राजा समुन्द्र तट पर गए और उन्हें वहाँ लट्ठा मिला, मगर अब प्रश्न ये है कि मूर्ति का निर्माण किससे कराया जाए? तभी वहाँ भगवान् विष्णु, श्री विश्वकर्मा के साथ बूढ़े मूर्तिकार के रूप में आये और कहा कि वे मूर्ति बना देंगे मगर एक शर्त है कि एक महीने तक मूर्ति बनने वाले कमरे में कोई नहीं आएगा चाहे वो राजा ही क्यों न हो और यदि कोई आया तो वे काम वही छोड़ देंगे और मूर्ति की उसी रूप में स्थापना करनी होगी।

राजा ने शर्त मान ली किन्तु महीने के आखिरी दिन, जब कमरे से आवाज आनी बंद हो गयी तो राजा से रहा नहीं गया और वे खिड़की से ताक-झाक करने लगे और मूर्तिकार कमरे से बाहर आ गए और कहा कि मूर्ति अभी अधूरी है और मूर्ति के हाथ नहीं बने है। राजा को बहुत पश्चाताप हुआ और उन्होंने मूर्तिकार से माफ़ी मांगी किन्तु उन्होंने कहा कि यही भगवान् की मर्जी है और मंदिर में मूर्ति की स्थापना कर दी गयी । इसलिए आज तक भी श्री जगन्नाथ भगवान के हाथ नहीं बनाये जाते है ।

  • श्री जगन्नाथ पुरी मंदिर ओडिशा के पुरी प्रांत में स्थित है। यहाँ भगवान श्रीकृष्ण को भगवान श्री जगन्नाथ के रूप में पूजा जाता है।
  • श्री जगन्नाथ धाम पुरी चार धामो में से एक धाम है।
  • यहाँ भगवान श्रीकृष्ण के साथ उनके भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा को पूजा जाता है।
  • इस मंदिर की सबसे खास विशेषता भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा है। जो हर वर्ष बहुत ही हर्षोउल्लास के साथ भगवान जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा माता (भगवान जगन्नाथ जी की मौसी का घर) के मंदिर तक होती है।
  • रथयात्रा से पहले, गुंडिचा माता के मंदिर को इन्द्रघुमन सरोवर से जल लाकर साफ किया जाता है।। यहाँ भगवान गुंडिचा माता के मंदिर में 7 दिन तक आराम करते है।
  • गुंडिचा मंदिर में भगवान के दर्शन को “आड़प-दर्शन” कहते है। गुंडिचा मंदिर को गुंडिचा बाड़ी भी कहा जाता है। गुंडिचा माता के मंदिर की मान्यता है कि यहाँ देवशिल्पी विश्वकर्मा ने भगवान जगन्नाथ,भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा देवी की प्रतिमा बनाई थी।
  • रथयात्रा के तीसरे दिन देवी लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ को ढूंढते हुए यहाँ आती है किन्तु द्वैतापति (सेवक) द्वार बंद कर देते हैं और माता लक्ष्मी रुष्ट होकर रथ का पहिया तोड़ देती है और अपने मंदिर लौट जाती है जो पास ही में एक मुहल्ले में बना है।
  • हर साल लाखों लोग रथ यात्रा में शामिल होते है , कहा जाता है कि जो भी रथ को खींचता है उसे 100 यज्ञ के बराबर का पुण्य प्राप्त होता है।
 श्री  जगन्नाथ धाम पुरी -रथयात्रा
श्री जगन्नाथ धाम पुरी -रथयात्रा
  • रथ यात्रा में सबसे आगे भाई बलभद्र बीच में बहन सुभद्रा व आखिरी में जगन्नाथ भगवान के रथ होते है।
  • रथ को उनके आकार व रंग से पहचाना जाता है।बलभद्र जी के रथ का रंग लाल व हरा होता है जिसे तालध्वज (45 फ़ीट) कहते है।
  • देवी सुभद्रा के रथ का रंग काला या नीला व लाल होता है जिसे दर्पदलन या पद्म रथ (44.6फ़ीट) कहते है।
  • भगवान जगन्नाथ के रथ का रंग लाल व पीला होता है जिसे गरुण ध्वज या नंदिघोष (45.6 फ़ीट) कहा जाता है।

अब हम उन 10 रहस्यो के बारे में बात करते है जो अभी तक अनसुलझे है।
तो चलिए शुरू करते है-

1) श्री जगन्नाथ धाम में सिर्फ और सिर्फ हिन्दू, सिख, जैन व बौद्ध धर्म के लोगों को ही जाने की इजाज़त है। किसी ओर धर्म के लोग या विदेशी लोग मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकते। यहाँ तक की 1984 में तात्कालिक प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी प्रवेश की इजाज़त नहीं दी गयी थी। क्योंकि मंदिर के पुजारी व सेवकों के अनुसार इंदिरा गांधी हिन्दू नहीं, पारसी है। उनका विवाह एक पारसी फ़िरोज़ जहांगीर गांधी से हुआ था तो विवाह के उपरांत वे पारसी हुई।वर्ष 2005 में थाईलैंड की रानी को भी मंदिर में जाने की इजाज़त नहीं दी गयी थी। ( तो क्या आपको ये पता था?) इसका कारण ये था कि श्री जगन्नाथ धाम पर 17 बार हमले हुए और हर बार मुख्य मूर्तियों को पुजारियों को छुपाना पड़ता था। आक्रमण के कारण एक बार मूर्ति को हैदराबाद भी छुपाया गया था ।

2) हवा के खिलाफ़ फहराता है ध्वज – मंदिर के शिखर पर जो मुख्य ध्वज है वह ध्वज हमेशा हवा से उल्टी दिशा में लहराता है। ऐसा क्यों होता है ये बहुत रिसर्च के बाद भी पता नही चल पाया। इसी के साथ एक चौकाने वाली बात ये भी है कि ध्वज को रोज बदला जाता है और बदलने वाला व्यक्ति उल्टा चढ़कर ध्वज तक पहुँचता है। ऐसा कहा जाता है कि यदि एक दिन भी ध्वज नहीं बदला तो मंदिर के द्वार 18 वर्षों के लिए बंद हो जाएंगे।

3) सुदर्शन चक्र – यह सुदर्शन चक्र अष्ट धातु से निर्मित है इस चक्र को नील चक्र भी कहते है ओर इसे बहुत ही पवित्र माना गया है। इसकी खास बात ये है कि इसे पुरी में कही से भी देखा जा सकता है और हमेशा ये आपको अपने सामने ही नज़र आएगा । ( हैं ना खास बात)

सुदर्शन चक्र व मुख्या ध्वज - श्री जगन्नाथ धाम
सुदर्शन चक्र व मुख्या ध्वज – श्री जगन्नाथ धाम

4) यहाँ बहती है उल्टी पवन – क्या आपको याद है कि 8-9 क्लास में हमें land breeze व sea breeze पढ़ाया गया था जिसमे ये बताया गया था कि हवा गरम होते ही ऊपर उठती है और ठंडी हवा उसकी जगह ले लेती है। तो इस हिसाब से धरती जल्दी गरम होती है तो दिन में हवा समुन्द्र से धरती की तरफ चलनी चाहिए और रात में धरती से समुन्द्र की और मगर यहाँ ऐसा नहीं होता यहाँ दिन में हवा धरती से समुन्द्र की तरफ चलती है और रात में समुन्द्र से धरती की तरफ। (हो गए न हैरान) ये भी अभी तक एक रहस्य ही है।

5) परिंदे भी नहीं मारते पर– अक्सर आपने देखा होगा कि मंदिरो के गुम्बदों पर पक्षियों का डेरा रहता है।मगर ये भी एक रहस्य है कि आखिर क्यों आज तक कोई पक्षी गुम्बद पर आकर नहीं बैठा। कोई फ़ोटो, वीडियो आज तक नहीं बनी जो ये दावा कर सके कि पक्षी मंदिर की गुम्बद पर बैठते हो।

6) नहीं होती मुख्य गुम्बद की परछाई – अब ये तो साइंस का रूल है कि जिस भी चीज़ पर रोशनी पड़ेगी उसकी छाया तो कही न कही बनेगी जरूर, चाहे छोटी हो या बड़ी लेकिन श्री जगन्नाथ मंदिर पर यह रूल फॉलो नही होता। मंदिर के मुख्य गुम्बद की परछाई धरती पर पढ़ती ही नहीं । ये भी एक अनसुलझा राज ही है।

7) दुनिया की सबसे बड़ी रसोई – अक्सर हमारे घरों में खाना कम या ज़्यादा होना आम बात है ऐसा तब होता है जब खाने वालो की संख्या फिक्स होती है, मगर ऐसी जगह जहाँ खाने वालों की संख्या कम या ज़्यादा होती रहती हो तो खाने का कम या ज़्यादा होना लाज़मी सी बात है मगर यही तो आश्चर्य की बात है कि श्री जगन्नाथ मंदिर की रसोई में न कभी प्रसाद कम पड़ा है ना ही कभी ज़्यादा। जैसे ही मंदिर के कपाट बंद होते है प्रसाद भी खत्म हो चुका होता है।

8) ऊपर के बर्तन में पकता है सबसे पहले खाना – ऐसा कैसे हो सकता है कि यदि एक के ऊपर एक 7 मिट्टी के बर्तनों को लकड़ी के ऊपर रखा जाए तो खाना पहले ऊपर के बर्तन का पकेगा और नीचे के बर्तन का खाना जलेगा भी नहीं। सदियो से यही प्रक्रिया अपनाई जा रही है मंदिर का प्रसाद बनाने के लिए मगर ऐसा क्यों और कैसे होता है किसी को नही पता।

9) नहीं सुनाई देती लहरो की आवाज़ – सिर्फ एक कदम निर्णय करता है कि समुन्द्र की लहरों की आवाज सुनाई देगी या नहीं। मंदिर के सिंहद्वार की यही खासियत है कि जैसे ही आप एक कदम सिंहद्वार के अंदर रखते है आपको लहरो की आवाज सुनाई देना बंद कर देती है। सिंघद्वार के बाहर आते ही समुन्द्र के लहरों को आसानी से सुना जा सकता है ।

10) मंदिर में नही आती शवो के जलने की गंध – मंदिर से बाहर निकलते ही एक मोक्षद्वार है जहाँ शवो को जलाया जाता है मगर इतना पास होते हुए भी आपको शवो के जलने की गंध नहीं आएगी जब तक आप मंदिर में हो । मंदिर से बाहर निकलते ही आपको गंध आना शुरू हो जाती है।

श्री जगन्नाथ भगवान का दिल

अब हम आपको भगवान के दिल के बारे में बताते है। भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण ने द्वापर युग में मानव रूप में जन्म लिया था। इस युग में महाभारत खत्म होने के लगभग 36 वर्ष पूरे होने के बाद श्रीकृष्ण की मृत्यु एक शिकारी का तीर उनके पैर के तिल में लगने की वजह से हुई थी। जब श्रीकृष्ण का अंतिम संस्कार किया गया तो उनका शरीर तो अग्नि देव को समर्पित हो गया किन्तु उनका दिल जलता रहा और उसमें से ज्योति निकल रही थी। ये देखकर शिकारी ने दिल नदी में फेंक दिया और नदी में जाते ही दिल एक अष्टधातु की लठ में बदल गया। और बहता हुआ राजा इंद्रदुम जो भगवान के परम भक्त थे उनके पास पहुंच गया। जब राजा को अष्टधातु लठ की सच्चाई पता चली तो उन्होंने वह मूर्ति में रखवा दिया जो आज भी हर 12 वर्ष में बदली जाती है।

मूर्ति बदलने का कारण ये हो सकता है कि जो लिक्विड या केमिकल उसमे से निकलता है वह काठ की मूर्ति को नुकसान पहुँचाता हो और इसी वजह से मूर्ति में चेंज भी आता हो। भगवान के दिल को किसी को देखने की इजाज़त नहीं है क्योंकि उससे मान्यता जुड़ी है कि जो भी उसे देखेगा उसकी मृत्यु हो जाएगी। जब भी नई मूर्ति को बनाया जाता है और दिल को पुरानी मूर्ति से नई मूर्ति में रखा जाता है तब सभी लाइट बन्द कर दी जाती है और लेने व देने वाले के हाथ में gloves व आखो पर पट्टी बांध दी जाती है। लाइट बन्द करने का कारण ये हो सकता है कि वह दिल रोशनी में activate हो जाता हो। कुछ-कुछ machanism जैसा हो सकता है।

कैसी लगी आपको हमारी ये पोस्ट कमेंट करके जरूर बताएं ओर यदि आप श्री जगन्नाथ धाम की यात्रा कर चुके हैं तो अपना अनुभव हमे बताना न भूलें।

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