Story – हर दोस्त सच्चा नहीं होता। दो दोस्तों की कहानी। short story on friendship

“दोस्ती ” यह एक शब्द नहीं है। यह एक ऐसा रिश्ता है, जिसेमें बाकी रिश्तो को भी निभाने की काबिलियत होती है। एक अच्छा दोस्त हमें पापा की तरह सलाह भी देते है, माँ की तरह हमारा ख्याल भी रखते है, भाई की तरह लड़ते भी है और बहन की तरह परेशान भी करते है।

पर जैसे-जैसे समय बदलता जा रहा है, बदलाव के कारण सच्ची दोस्ती तो जैसे कही गुम सी हो गई है।आज हमारे सोशल मीडिया पर बहुत सारे friends और बहुत से लोगो से मिलना जुलना है, परंतु वह लोग क्या सच में आपके साथ सच्ची दोस्ती रखते हैं ?

यह ख्याल आपके मन में कभी ना कभी आया ही होगा। अक्सर हमारे साथ ऐसा होता है कि जब हम एक तनावपूर्ण स्थिति में होते हैं, उस समय हमारे पास हजार friends में से मात्र 2 से 5 दोस्त ही बचते हैं।

हम सभी सुशांत सिंह राजपूत को जानते ही है ।वह सफल अभिनेता थे।सब कुछ था उनके पास पैसा, घर, popularity, कार, बाइक आदि । सब कुछ होने के बाद भी सुशांत सिंह राजपूत अकेले पड़ गए थे क्योंकि कई बार ऐसी situation आती है, जिसमें हम अपने परिवार या अपने प्रिय जनों को नहीं बता पाते हैं।

ऐसे में सिर्फ एक ही इंसान हमारी help कर सकता है वो होता है “दोस्त”। क्योंकि एक दोस्त ही होता है जिससे हम बिना सोचे समझे बाते कर सकते है।

मगर उसके लिए हमें सच्चे दोस्त को पहचानना आना चाहिए। सच्चे दोस्त की परख हमेशा बुरे वक्त में की जाती है। सच्चे दोस्त को कैसे पहचाने इसके लिए हम आपके लिए एक छोटी सी कहानी लेकर आए हैं इससे आपको जो कुछ भी सीखने को मिले हमें कमेंट करके जरूर बताएं।

चलिए कहानी शुरू करते है –

सुंदरबन गांव में 2 दोस्त रहते थे सोनू और मोनू। इन दोनों की दोस्ती के पूरे गांव में चर्चा थी। क्योंकि वह बहुत छोटे से साथ थे। साथ में खेलना, घूमना, इधर उधर जाना एक दूसरे के घर मस्ती करना और पढ़ाई करना आदि यह सभी काम वे साथ में करते थे पर सोनू मोटा था और मोनू पतला दुबला था और फुर्तीला भी था।

एक दिन जब वे साथ में गेम खेल रहे थे तो मोनू के घर मेहमान आए और वह बहुत ही स्वादिष्ट आम लेकर आएं। सोनू को भी आम बहुत ज्यादा पसंद थे और उन दोनों ने मिल बांट कर आम खाए और सोनू गेम खेलने के बाद अपने घर की तरफ रवाना हो गया और कुछ दिन बाद मोनू सोनू के घर आया और उसने बताया कि पास के गांव से उसे शादी में जाने का निमंत्रण प्राप्त हुआ है ।

इस पर सोनू ने कहा कि वह भी उसके साथ चलेगा और दोनों ने साथ में चलने की सलाह बनाई परंतु जाने से पहले उन्होंने कुछ तैयारी करनी शुरू कर दी जैसे कपड़े निकालना, उसको धोना, प्रेस करवाना और सोनू मोनू घर से पैसे लेकर इस विवाह में जाने के लिए इत्र भी लेकर आए जो कि उन्हें गांव में ही मोनू के चाचा से मिल गया था।

रास्ते में आते वक्त मोनू ने सोनू को बताया कि उन्हें हरी नगर जाना है और सोनू यह सुनकर थोड़ा बहुत डर गया क्योंकि रास्ते में एक जंगली जानवरों से भरा एक जंगल पड़ता था। इसलिए वह थोड़ा डर गया परंतु मोनू ने कहा कि वह दोनों साथ चलेंगे और डरने वाली कोई बात नहीं है और इसी तरीके से दोनों ने अगले दिन जाने की सलाह बनाई और अपने अपने घर को चले गए है।

अगली सुबह सोनू मोनू के घर पहुंच गया और वह दोनों शादी में जाने के लिए रवाना हो गए।

जैसे जैसे वह आगे बढ़ रहे थे, उन्हें थकान होने लगी। साथ ही उन्हें भूख लगी और उन्होंने रास्ते के लिए कुछ फल पहले से ले रखे थे जो उन्होंने एक जगह बैठकर खा लिए।

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कुछ ही दूरी पर अब जंगल आरंभ होने वाला था पर दोनों दोस्तों को एक दूसरे पर विश्वास था और उन्होंने इसी विश्वास के चलते आगे कदम बढ़ाए और जंगल में प्रवेश कर लिया। आधा जंगल पार होने पर उन्हें बंदर, चील, कौवे, गिलहरी, खरगोश छोटे-मोटे जानवर ही दिखे पर थोड़ी दूर पर आगे चलने पर उन्हें अचानक सामने से भालू आता हुआ दिखा और इसके चलते मोनू ने जैसे ही भालू को देखा पतला और फुर्तीला होने के कारण पेड़ पर चढ गया।

सोनू मोटा होने की वजह से नीचे ही रह गया और मोनू ऊपर से सोनू को देख रहा था और सोनू यह सोच रहा था कि मैं अब वह मैं करू ? तभी उसे उसकी दादी मां की कही हुई बात याद आई कि भालू मृत इंसान को नहीं खाता और वह तुरंत जमीन पर अपनी सांस कुछ समय के लिए रोक कर लेट गया। जैसे ही भालू उसके शरीर के पास आया।

उसने उसे सूंघा और आगे बढ़ गया क्योंकि भालू को लगा कि वह मृत शरीर है और जब भालू कुछ दूरी पर चला गया तो ऊपर से मोनू उतरा और उसने कहा कि सोनू यह भालू तुमसे क्या कह रहा था? सोनू पहले ही बहुत ज्यादा गुस्से में था और उसने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा, भालू मुझसे कह रहा था कि

जो मित्र मुसीबत के समय साथ छोड़ दे, उस पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए।

यह सुनकर मोनू को अपनी गलती का एहसास हुआ और सोनू और मोनू कि दोस्ती हमेशा के लिए टूट गई। सोनू बिना शादी में गए,अपने घर की ओर आ गया।

शिक्षा – सच्चे दोस्त मुसीबत के समय हमेशा आपके साथ खड़े होते है।

तो दोस्तों इस कहानी के माध्यम से हम आपको यह बताना चाहते है कि जरूरी नही जो आपके साथ बचपन से रहे वो आपका सच्चा दोस्त है। दोस्त ऐसा बनाओ जो मुसीबत के समय आपके साथ खड़ा रहे ना कि मुसीबत के समय भाग जाए। आप भी अपने दोस्तों की मुसीबत के समय मदद करें और अपने दोस्तों का हाल खबर लेते रहें। जिससे आपके दोस्त को अच्छा भी लगेगा और वे आपसे अपनी परेशानी शेयर भी करेंगे।

आप लोगों के साथ जैसे रहोगे वैसे ही लोग आपके साथ रहेंगे इसीलिए अपने दोस्तों के साथ एक मजबूत और लंबे समय तक चलने वाली friendship को बनाए रखने का प्रयास करें। हमेशा एक दूसरे की मदद करते रहें और दोस्तों अगर आपको यह कहानी पसंद आई तो हमें कमेंट में जरूर बताना।

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